Essay On Van Mahotsav In Hindi Language

Van Mahotsav poem essay slogans hindi वृक्षारोपण से तात्पर्य बहुत अधिक संख्या मे पेड़ो को लगाने से है| जैसा की हम सभी लोग जानते है कि वृक्ष हमारी प्रकृति और हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है,  इनके बिना हमारी प्रकृति और हमारे जीवन की परिकल्पना करना भी व्यर्थ है. पहले हमारे भू भाग के लगभग 50 प्रतिशत हिस्से पर वन फैले हुये थे, परंतु वृक्षो की कटाई के चलते यह प्रतिशत 30 से भी कम पर पहुच गया है. और वृक्षो की कटाई के दुष्परिणाम देखने के लिए हमे बहुत दूर तक जाने या विश्व स्तर कोई खोज करने की आवश्यकता नहीं है| हम अपने आस पास आए छोटे छोटे परिवर्तनों से इसका अंदाजा लगा सकते है.

वन महोत्सव या वृक्षारोपण पर कविता, स्लोगन व निबंध

Van Mahotsav poem essay slogans hindi

आज के समय मे सुबह अखबार खोलते ही जल की कमी, शहरो और गावो मे जंगली जानवरो का घुसकर इंसानों को नुकसान पहुचाना बहुत ही आम बात है, परंतु गौर किया जाए तो इसकी जिम्मेदरी भी हमारी है| अगर हम प्राणियों के रहने का स्थान छिनेंगे, तो वह शहरो की ओर आएंगे ही और उनका शहरो की ओर आना ही हमारे लिए भय का कारण है. आज के समय मे वन लकड़ी की तस्करी करने वालो के लिए मात्र पैसो की खान है, वे बस पैसा चाहते है चाहे इसकी कीमत उन्हे किसी की जान लेकर चुकाना पड़े.

वनो की कटाई को देखते हुये भारत सरकार द्वारा एक दिन वृक्षारोपण को समर्पित किया गया, जिसे वन महोत्सव  के नाम से जाना जाता है, आइये जानते है की ये वनमहोत्सव है क्या.

वनो की कटाई के कारण हुये दुष्परिणाम:    

  • कुछ नदिया जो आज भी नक्शो पर विद्यमान है, वो वास्तव मे विलुप्त सी हो गयी है.
  • वर्षा का कोई ठिकाना नहीं है, कही सूखा पड़ता है, तो कही बाढ़ देखने को मिलती है.
  • बारिश का मौसम 4 महीने सीमित नहीं रहकर, साल भर मे कभी भी बारिश आ जाती है और फसलों को नुकसान होता है.
  • बेमौसम ओला वृष्टि समान्य बात हो गयी है.
  • वनो के कट जाने के कारण कई वन्य प्राणी विलुप्त से हो गए है.
  • वन्य प्राणियों के रहने का स्थान संरक्षित नहीं होने के कारण वे शहरो और गावों के तरफ पलायन कर रहे है.
  • वृक्ष शरीर के लिए आवश्यक गैस ऑक्सिजन का प्रमुख स्त्रोत है, और इनके विलुप्त होने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है.
  • वनो की कटाई से मृदा सवर्दन भी बड़ा है.
  • वनो की कटाई से सिचाई के साथ साथ पीने के पानी की समस्या भी उत्पन्न हुई है.

वनमहोत्सव  क्या है?

वन महोत्सव (Annual tree planting festival) से तात्पर्य पूरे भारत वर्ष मे एक दिन सभी भारत वासियो द्वारा बहुत बड़ी संख्या मे वृक्षो के रोपण से है. यह नीति या उत्सव सन 1950 मे कृषि मंत्री रहे कुलपति डॉ. के. एम. मुंशी द्वारा चालू की गयी थी. तब से लेकर आज तक यह एक उत्सव के रूप मे हर साल  मनती आई है. हर साल इसकी तारीख जुलाई के प्रथम सप्ताह मे तय की गयी है, इसी समय मे छोटी बड़ी संस्थाओ द्वारा या कुछ व्यक्तियों के समूह द्वारा उचित स्थान पर जाकर उचित संख्या मे वृक्षारोपण किया जाता है. पहले से मौजूद पेड़ो को जिंदा रहने के लिए कम पानी की जरूरत होती है, परंतु नए लगाए गए वृक्षो को पनपने के लिए अधिक मात्रा मे पानी की जरूरत होती है. जुलाई का समय हमारे यहा बारिश का मौसम होता है, इसलिए यह समय वृक्षो के पनपने के लिए उचित होता है तथा आने वाले कुछ महीनो मे भी समय समय पर पेड़ो को प्रकृति द्वारा पानी देकर पोषित किया जाता है, मतलब यह समय वृक्षारोपन के लिए एकदम उपयुक्त है.

सन 1952 मे तैयार राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार देश के कुल भू भाग मे से 33 प्रतिशत भाग पर पेड़ होना चाहिए, जिसे पहाड़ी  क्षेत्रों के 60 प्रतिशत और मैदानी क्षेत्रों के 20 प्रतिशत मे  विभाजित किया है. देश के कुछ हिस्सो जैसे हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, त्रिपुरा आदि मे वनो का अच्छा खासा फैलाव है, परंतु फिर भी यह अनुमानित क्षेत्रफल 33 प्रतिशत से कम है. राजस्थान, गुजरात और हरियाणा के कुछ हिस्से रेगिस्तान मे परिवर्तित होते जा रहे है.

भारत मे मौजूद कुछ प्रमुख वन:

यह बात सत्य है कि हमारे यहा वनो की कटाई बड़ी तेजी से की जा रही, परंतु फिर भी आज भारत की धरती पर कुछ बहुत ही अनूठे और सुंदर वन मौजूद है| जिनकी तुलना किसी और से नहीं की जा सकती, इन्ही  मे से कुछ के बारे मे हम आपको बता रहे है.

  • मध्य प्रदेश का कान्हा किसली –   मध्य प्रदेश मे जबलपुर और मंडला शहर मे सड़क मार्ग मे मौजूद यह वन अपने खुले घास के मैदान, बास और टीके के वृक्ष के लिए मशहूर है. इस वन मे काला हिरण, बारह सिंगा, सांभर, चीते, नीलगाय, जंगली सुअर, बाघ, तेदुआ आदि प्राणी आसानी से देखे जा सकते है. इस वन का क्षेत्रफल लगभग 2051.74 वर्ग किलोमीटर है.
  • गुजरात और पश्चिम मध्य भारत का गिर वन्यजीव अभ्यारण- गुजरात और पश्चिम मध्य भारत के 1424 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र मे फैला, यह उद्यान भारत के प्रमुख वनो मे से एक है. यहा के प्रमुख प्राणी शेर, जंगली सुअर और तेंदुआ है. माना जाता है कि शेरो के लिए भारत मे यह वन एक अंतिम आश्रय रह गया है. इस वन मे तुलसी श्याम झरने के पास मौजूद कृष्ण मंदिर का अपना अलग ही सौंदर्य है.
  • असम का काजीरंगा राष्ट्रीय अभ्यारण- असम राज्य की 430 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल मे फैला यह बहुत ही सुंदर वन है . एक सिंग वाला गेंडा यहा का प्रमुख प्राणी है| 2012 मे आई भीषण बाढ़ के कारण यहा 500 से अधिक जीवों की मृत्यु हो गयी. इस वनो मे अलग प्रजाति की चीलो और तोतो के साथ साथ सर्दियों मे साइबेरिया से आए पक्षी आकर्षण का केंद्र है.     
  • पश्चिम बंगाल का सुंदरवन – भारत और बांग्लादेश की सीमाओ के बीच फैला यह वन एक बाघ संरक्षित क्षेत्र है. यह उद्यान एक विश्व धरोहर के रूप मे संरक्षित किया गया है.
  • जिम कार्बेट नेशनल पार्क – भारत के मुख्य उद्यानो मे शामिल यह उद्यान उत्तरांचल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह अपने सुंदर सुंदर फूलो और वन्यजीवो के लिए मशहूर है, यहा के प्रमुख जानवर हाथी, चीता और शेर के साथ साथ 50 प्रकार के स्तनीय, 580 प्रकार के पक्षी और 25 प्रकार के रेंगने वाले जीव पाये जाते है.
  • ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान – हिमालय के कुल्लू के आधे से अधिक भाग मे मौजूद यह वन लगभग 754.4 वर्ग किलोमीटर मे फैला है| 2014 मे इसे प्रकृतिक विश्व की धरोहर घोषित किया गया है. कुल्लू मनाली की घाटिया विश्व प्रसिद्ध है, यह भारत का प्रमुख पर्यटन स्थल है.
  • इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान – भारत के छत्तीसगढ़ का यह प्रमुख उद्यान है यह जंगली भैसो का एक मात्र ठिकाना है. यह छत्तीसगढ़ का एकमात्र टाइगर रिजर्व क्षेत्र है. इंद्रावती नदी के किनारे होने के कारण इसका नाम इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान पड़ा.
  • दक्षिण भारत का बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान – दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य, मे स्थित यह वन एक समय मे मैसूर के राजा की निजी विरासत थी. उस समय मे यहा के कई शेरो का शिकार किया किया गया.
  • अंडमान निकोबार का कैंपबल बे राष्ट्रीय उद्यान – सन 1992 मे राष्ट्रीय उद्यान के रूप मे अधिकृत यह वन अंडमान निकोबार (बंगाल की खाड़ी) मे स्थित है.
  • राजस्थान का सरिस्का एवं रणथ्ंभोर उद्यान – राजस्थान मे 2 नेशनल पार्क है, जिसमे से एक टाइगर रिजर्व क्षेत्र सरिस्का और दुसरा रणथ्ंभोर के जंगल है. 1995 मे  अभ्यारण घोषित सरिस्का दिल्ली से मात्र 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

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Sneha

स्नेहा दीपावली वेबसाइट की लेखिका है| जिनकी रूचि हिंदी भाषा मे है| यह दीपावली के लिए कई विषयों मे लिखती है|

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Assam Government is going to observe 68th Van Mahotsav, ‘the festival of tree’ along with the rest of the country from July 1 to July 7. The primary objective of this week-long festival is to encourage aforestation for sustainable ecological balance by sensitising masses on tree plantation and forest conservation. During these seven days, in addition to conducting various awareness programmes, a large number of saplings of different species will be planted throughout the state. As the state has been vulnerable to floods, droughts, heat waves, cyclones, and other natural disasters it has become imperative for people from cross section of the society; private sector, public sector NGO, educational and other institutions, farmers etc. to come up and contribute their bit to save the mother earth.

To create awareness among the students of the state on this tree planting movement, the forest department of Assam is organising Essay writing competitions on the topic, “As I see a Green Assam and Pollution free Assam”.

The best entries will be awarded with some exciting prizes

Last Date of Entry- July 31, 2017

Terms & Conditions:

• The theme of the essay should be “As I see a Green Assam and Pollution free Assam”
• The essay should not exceed 1000 words
• Essays submitted should be in English, Assamese, Bengali, Bodo and Hindi Language only
• The essay should be submitted in the form of a PDF file, with size less than 10MB
• A participant can send only one entry. In case it is found that any participant has submitted more than one entry, all will be considered invalid.
• The entry should be original. Copied entries will not be considered under the contest.
• The participant must be the same person who has written the essay and plagiarism would not be allowed.

Disclaimer: All efforts will be made by the Selection Committee to check for originality of the submissions, however, Assam MyGov portal will not be held accountable for any submission identified as a copy.

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